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مركز البحوث وتقنية المعلومات - دار التأصيل

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دار التأصيل

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الثانية

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1437 AH

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القاهرة

هذا، وفي النسخة آثار للرطوبة، ينظر: [١/ ١ ب]، و[١/ ٢٥ ب]، و[١/ ٢٩ ب]، و[١/ ٥٣ ب]، و[٢/ ٥ أ]، و[٢/ ٢٢ أ]، و[٢/ ٦٥ أ]، و[٢/ ١٢٣ أ]، و[٢/ ١٢٤ أ]، و[٥/ ٢١ ب]، و[٥/ ٢٢ ب]، و[٥/ ١٣١ ب]، ومن [٥/ ١٧٣ أ] حتى [٥/ ١٧٥ ب]. ولم نقف علي أثر الرطوبة بوضوح في الأجزاء: الثالث والرابع.
ووقع بالنسخة بعض الطمس، ينظر: [١/ ٧ ب]، و[١/ ١٣ أ]، و[١/ ١٠٦ ب]، و[١/ ١١٩ ب]، و[١/ ١٣٣ ب]، و[٢/ ٣٦ أ، ب]، و[٢/ ٥٥ أ]، و[٢/ ٨٧ أ]، و[٢/ ٩٠ أ]، و[٢/ ١١٨ ب]، و[٢/ ١١٩ ب]، و[٣/ ٩ أ]، و[٣/ ٤٧ ب]، و[٣/ ٥٤ ب]، و[٣/ ٥٥ أ]، و[٣/ ٩٤ ب]، و[٣/ ١٠٣ أ]، و[٤/ ١٢ ب]، و[٤/ ١٥ ب]، و[٤/ ٨٢ ب]، و[٤/ ١٤٥ ب]، و[٤/ ١٦١ أ]، و[٥/ ٢٠ أ، ب]، و[٥/ ٦٩ أ]، و[٥/ ١٣٦ ب]، و[٥/ ١٦١ ب]، و[٥/ ١٦٣ أ]، و[٥/ ١٦٤ ب].
كما أن بالنسخة بعض البياضات وإن كانت قليلة، ينظر علي سبيل المثال: [١/ ١١ ب]، و[١/ ١٢ أ]، و[٢/ ٥٣ أ].
ومما ينبغي التنبيه عليه أن هذه النسخة قد اعتراها كثير من السقط والتصحيف والتحريف، وقد عالجنا ضبط هذه الأخطاء أثناء عملنا من خلال النسخ الخطية الأخرى أو المصادر الوسيطة، لا سيما التي تنقل عن الإمام عبد الرزاق.
توثيقات النسخة:
هذه النسخة جيدة فيها بعض آثار الإتقان، فمن ذلك أن الناسخ يستعمل الدائرة المنقوطة بعد نهاية الخبر أو الفقرة، وهذا مما يدل على المقابلة. ينظر علي سبيل المثال: [١/ ٢ أ]، و[١/ ٢٤ ب]، و[١/ ٥٧ أ]، و[١/ ٨٠ ب]، و[١/ ١١٠ ب]، و[١/ ١٢٢ ب]، و[٢/ ٥ أ]، و[٢/ ١٤ أ]، و[٢/ ٥٤ ب]، و[٢/ ٧٨ أ]، و[٢/ ١٠٧ ب]، و[٢/ ١٣٦ ب]، و[٣/ ١ أ]، و[٣/ ٤٠ ب]، و[٣/ ٦٥ أ]، و[٣/ ٧٨ أ]، و[٣/ ١٠٨ أ]، و[٣/ ١٢٠ ب].

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